कायेन्द्रियसिद्धिरशुद्धिक्षयात्तपस: ।। 43 ।। शब्दार्थ :- तपस: ( तप के पालन या प्रभाव से ) अशुद्धि- क्षयात् ( अशुद्धि का नाश होने से ) काय ( काया अर्थात शरीर की ) इन्द्रिय ( इन्द्रियों अर्थात कर्मेन्द्रियों व ज्ञानेन्द्रियों की ) सिद्धि: ( सिद्धि प्राप्त होती है । ) सूत्रार्थ :- तप के अनुष्ठान …
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- Category: Sadhan Paad








