आठ प्रकार के कुम्भक ( प्राणायाम ) सूर्यभेदनमुज्जायी सीत्कारी शीतली तथा । भस्त्रिका भ्रामरी मूर्च्छा प्लाविनीत्यष्टकुम्भका: ।। 44 ।। भावार्थ :- सूर्यभेदी, उज्जायी, सीत्कारी, शीतली, भस्त्रिका, भ्रामरी, मूर्च्छा व प्लाविनी ये आठ प्रकार के कुम्भक अर्थात प्राणायाम कहे गए हैं । बन्ध का प्रयोग पूरकान्ते तु कर्तव्यो बन्धो जालन्धराभिध: । कुम्भकान्ते …
- Home
- |
- Category: Hatha Pradipika








