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Hatha Pradipika

Hatha Pradipika Ch. 2 [65-67]

अध्याय 2: प्राणायाम

भस्त्रिका प्राणायाम के लाभ

मूल श्लोक · 2.65

वातपित्तश्लेष्महरं शरीराग्निविवर्धनम् ।। 65 ।।

भावार्थ

भस्त्रिका प्राणायाम करने से साधक के सभी वात, पित्त व कफ से सम्बंधित सभी रोग नष्ट हो जाते हैं और जठराग्नि प्रदीप्त ( मजबूत ) हो जाती है ।

मूल श्लोक · 2.66

कुण्डलीबोधकं क्षिप्रं पवनं सुखदं हितम् । ब्रह्मनाडीमुखेसंस्थकफाद्यर्गलनाशनम् ।। 66 ।।

भावार्थ

भस्त्रिका प्राणायाम सुषुम्ना नाड़ी के मुख पर जमा कफ आदि मलों को दूर करता है । जिसके कारण शरीर का हित करने व सुख पहुँचाने वाली प्राणवायु सुगमता से सुषुम्ना नाड़ी में प्रवेश करके कुण्डलिनी को जागृत करने का काम करती है ।

मूल श्लोक · 2.67

सम्यग्गात्रसमुद्भूतग्रन्थित्रयविभेदकम् । विशेषेणैव कर्तव्यं भस्त्राख्यं कुम्भकं त्विदम् ।। 67 ||

भावार्थ

यह भस्त्रिका नामक प्राणायाम शरीर में स्थित तीनों ग्रन्थियों ( ब्रह्मग्रन्थि, विष्णुग्रन्थि और रुद्रग्रन्थि ) का भली प्रकार से भेदन अर्थात उनको खोलने का काम करता है । इसलिए भस्त्रिका प्राणायाम का अभ्यास सभी साधकों को विशेष रूप से करना चाहिए ।

Reader discussion

Comments (4)

These comments have been preserved from the original Dr. Somveer Yoga website.

  1. Nisha bhardwaj

    Thanku sir

  2. Lata Sudhir Baisane

    धन्यवाद।

  3. neetu

    Thanks sir

  4. ranjana chhabra

    thanku sir