खेचरी मुद्रा वर्णन सव्यदक्षिणनाडिस्थो मध्ये चरति मारुत: । तिष्ठते खेचरी मुद्रा तस्मिन् स्थाने न संशय: ।। 43 ।। भावार्थ :- चन्द्र ( बायीं नासिका ) व सूर्य ( दायीं नासिका ) में चलने वाली प्राणवायु जब बीच में अर्थात् सुषुम्ना नाड़ी में चलने लगती है । तब वह खेचरी मुद्रा की अवस्था होती …
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- Category: hatha pradipika 4








