चार प्रकार के भक्त चतुर्विधा भजन्ते मां जनाः सुकृतिनोऽर्जुन । आर्तो जिज्ञासुरर्थार्थी ज्ञानी च भरतर्षभ ।। 16 ।। व्याख्या :- हे भरतवंशियों में श्रेष्ठ अर्जुन ! चार प्रकार के भक्त मेरा भजन अर्थात् भक्ति करते हैं – आर्त ( दुःख अथवा संकट से छुटकारा चाहने वाले ), जिज्ञासु ( ज्ञान अथवा रहस्य …
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- Category: Bhagwad Geeta








