दृष्टानुश्रविकविषयवितृष्णस्य वशीकारसंज्ञा वैराग्यम् ।। 15 ।। शब्दार्थ :- दृष्ट , ( देखे हुए ) आनुश्रविक , ( सुने हुए ) विषय , ( उपभोग की वस्तुओं को ) वितृष्णस्य, ( प्राप्त करने की इच्छा न होना ही ) वशीकार – संज्ञा, ( पूर्ण नियंत्रण की अवस्था को ही ) वैराग्यम् ( राग का अभाव या …
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- Category: Samadhi Paad








