विपर्ययो मिथ्याज्ञानमतद्रूपप्रतिष्ठम् ।। 8 ।। शब्दार्थ :- अतद्रुपप्रतिष्ठम् , ( जो उस पदार्थ या वस्तु के स्वरूप में प्रतिष्ठित नही है। ) मिथ्याज्ञान , ( झूठी या गलत जानकारी ) विपर्यय ( विपरीत, उल्टा ) है। सूत्रार्थ :- विपर्यय वृत्ति एक ऐसा झूठा या गलत ज्ञान है, जो कि वहाँ उस पदार्थ या …
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- Category: Samadhi Paad








