दुःखानुशयी द्वेष: ।। 8 ।।    शब्दार्थ :- दुःख, ( कष्ट अथवा तकलीफ ) अनुशयी, ( को भोगने के बाद उस दुःख अथवा कष्ट के प्रति क्रोध या उसके नाश की इच्छा का होना ही ) द्वेष, ( द्वेष नामक क्लेश कहलाता है।)   सूत्रार्थ :- दुःख या किसी कष्ट को भोगने के बाद उस

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Yoga Sutra 2 – 8

स्वरसवाही विदुषोऽपि तथारुढोऽभिनिवेश: ।। 9 ।।   शब्दार्थ :- स्वरसवाही, ( जो परम्परागत अर्थात पीढ़ियों से स्वभाविक रूप से चला आ रहा है ) विदुष, ( विद्वानों में ) अपि, ( भी ) तथारुढ:, ( एक समान भाव से विद्यमान अर्थात पाया जाने वाला ) अभिनिवेश, ( मृत्यु अर्थात मौत का डर है )  सूत्रार्थ

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Yoga Sutra 2 – 9

ते प्रतिप्रसवहेया: सूक्ष्मा: ।। 10 ।।   शब्दार्थ :- ते, ( वें ) सूक्ष्मा:, ( प्रभावहीन )  प्रतिप्रसवहेया, ( क्लेश चित्त के साथ ही प्रकृत्ति में लीन हो जाते हैं । )   सूत्रार्थ :- चित्त के प्रकृत्ति में लीन होते ही वें प्रभावहीन सभी अविद्या आदि क्लेश भी चित्त के साथ ही प्रकृत्ति में

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Yoga Sutra 2 – 10

ध्यानहेयास्तद्वृत्तय: ।। 11 ।।   शब्दार्थ :- तद् वृत्तय:, ( उन क्लेशों की वृत्तियाँ ) ध्यान, ( ध्यान के द्वारा ) हेया, ( नष्ट अथवा खत्म करने योग्य होती हैं । )   सूत्रार्थ :- उन सभी क्लेशों की जो स्थूल वृत्तियाँ हैं । उनको ध्यान के द्वारा नष्ट किया जा सकता है ।  

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Yoga Sutra 2 – 11

क्लेशमूल: कर्माशयो दृष्टादृष्टजन्मवेदनीय: ।। 12 ।।   शब्दार्थ :- क्लेशमूल:, ( क्लेशों की उत्पत्ति का कारण अर्थात अविद्या ) कर्माशय:, ( कर्मों के संस्कारों का समुदाय ) दृष्ट, ( जो दिखाई दे रहा है अर्थात वर्तमान व ) अदृष्ट, ( जो दिखाई नहीं दे रहा अर्थात भविष्य के ) जन्मवेदनीय, ( जन्मों में भोगा जाने

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Yoga Sutra 2 – 12

सति मूले तद्विपाको जात्यायुर्भोगा: ।। 13 ।।   शब्दार्थ :- मूले- सति, ( मूल अर्थात मुख्य कारण के रहने से ) तद्विपाक:, ( उसका परिणाम या फल ) जाति, ( पुनर्जन्म ) आयुर्भोगा:, ( आयु या उम्र और उनका भोग अर्थात भुगतान होते हैं।)   सूत्रार्थ :- जब तक क्लेशों की विद्यमानता रहेगी अर्थात जब

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Yoga Sutra 2 -13

ते ह्लादपरितापफला: पुण्यापुण्यहेतुत्वात् ।। 14 ।।   शब्दार्थ :- ते, ( वें ) ह्लाद, ( सुख या खुशी ) परिताप, ( दुःख अथवा शोक ) फला, ( परिणाम अर्थात फल देने वाले ) पुण्य, ( अच्छे या पवित्र कर्म ) अपुण्य, ( बुरे या पाप कर्म ) हेतुत्वात्, ( के कारण से उत्पन्न या पैदा

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Yoga Sutra 2 – 14