एतत् त्रयं महागुह्यं जरामृत्युविनाशमम् । वह्निवृद्धिकरं चैव ह्यणिमादिगुणप्रदम् ।। 30 ।। भावार्थ :- महाबन्ध, महामुद्रा और महावेध मुद्राओं को पूरी तरह से गुप्त रखना चाहिए । इनका अभ्यास बुढ़ापा व मृत्यु को दूर करता है । जठराग्नि को मजबूत करती हैं । साथ ही अणिमा आदि सिद्धियाँ प्रदान करती हैं । अष्टधा क्रियते …
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- Category: Hatha Pradipika








