आसन प्रारम्भ स्वस्तिकासन जानूर्वोरन्तरे सम्यक्कृत्वा पादतले उभे । ऋजुकाय: समासीन: स्वस्तिकं तत् प्रचक्षते ।। 21 ।। भावार्थ :- दोनों पैरों के तलवों ( पैर के सबसे नीचे का भाग ) को एक दूसरे पैर अर्थात बायें पैर के तलवे को दायीं पिण्डली व जांघ के बीच में और दायें पैर के तलवे को बायें …
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- Category: Hatha Pradipika








