Skip to content

Hatha Pradipika

Hatha Pradipika Ch. 1 [35-36]

अध्याय 1: आसन

प्रमुख चार आसन

मूल श्लोक · 1.35

चतुरशीत्यासनानि शिवेन कथितानि वै । तेभ्यश्चतुष्कमादाय सारभूतं ब्रवीम्यहम् ।। 35 ।।

भावार्थ

भगवान शिव ने कुल चौरासी ( 84 ) आसनों का वर्णन किया है । यहाँ पर मैं उन सभी आसनों के सार कहे जाने वाले मुख्य चार आसनों का वर्णन कर रहा हूँ ।

विशेष

यहाँ पर स्वामी स्वात्माराम ने आदिनाथ भगवान शिव द्वारा बताये गए चौरासी आसनों में से चार आसनों को प्रमुख माना है ।

चार प्रमुख आसनों के नाम

मूल श्लोक · 1.36

सिद्धं पद्मं तथा सिंहं भद्रं चेति चतुष्टयम् । श्रेष्ठं तत्रापि च सुखे तिष्ठेत् सिद्धासने सदा ।। 36 ।।

भावार्थ

सिद्धासन, पद्मासन, सिंहासन और भद्रासन यह चार आसन सभी आसनों में श्रेष्ठ हैं । इन चारों में से भी सिद्धासन को श्रेष्ठ माना गया है । इसलिए कहा गया है कि साधक को सदा सिद्धासन में ही सुख पूर्वक बैठकर योग साधना करनी चाहिए ।

Reader discussion

Comments (8)

These comments have been preserved from the original Dr. Somveer Yoga website.

  1. Nisha bhardwaj

    Thanku sir ??

  2. Mansi

    ???

  3. Lata Sudhir Baisane

    धन्यवाद।

  4. Neelam

    Thank you sir

  5. आलोक कुमार पटवा

    ॐ गुरुदेव*

    आपका हृदय से आभार।

  6. Anju siwach

    Thank you sir

  7. Gopal Lal Sharma

    सिद्धासन में ही क्यों ?

  8. Pooja yadav

    Very nice sir