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Hatha Pradipika

Hatha Pradipika Ch. 1 [19-20]

अध्याय 1: आसन

आसन वर्णन

मूल श्लोक · 1.19

हठस्य प्रथमाङ्गत्वादासनं पूर्वमुच्यते । कुर्यात्तदासनं स्थैर्यमारोग्यं चाङ्गलाघवम् ।। 19 ।।

भावार्थ

स्वामी स्वात्माराम आसन को हठयोग के पहले अंग के रूप में मानते हैं । इसलिए सबसे पहले उसी का वर्णन करते हैं । आसन के वर्णन के साथ ही उससे मिलने वाले लाभ के बारे में बताते हुए कहते हैं कि आसन करने से स्थिरता, आरोग्यता ( रोगों का अभाव ) व शरीर के सभी अंगों में हल्कापन आता है ।

विशेष

इस श्लोक में आसन करने से मिलने वाले मुख्य तीन लाभों का वर्णन किया गया है । जिनमें स्थिरता, आरोग्यता व अंगों में हल्कापन शामिल हैं ।

मूल श्लोक · 1.20

वसिष्ठाद्यैश्च मुनिभिर्मत्स्येन्द्राद्यैश्च योगिभि: । अङ्गीकृतान्यासनानि कथ्यन्ते कानिचिन्मया ।। 20 ।।

भावार्थ

ऋषि वसिष्ठ आदि व योगी मत्स्येंद्रनाथ आदि योगियों द्वारा मान्यता प्राप्त कुछ आसनों का वर्णन यहाँ पर मेरे द्वारा किया जा रहा है ।

विशेष

यहाँ पर योगी स्वात्माराम ने अपने से पूर्व में हुए ऋषियों व योगियों द्वारा बताए गए आसनों को आधार रूप में स्वीकार किया है । इससे भी यह पता चलता है कि हठयोग साधना मुख्य रूप से गुरु- शिष्य परम्परा पर ही आधारित है ।

Reader discussion

Comments (6)

These comments have been preserved from the original Dr. Somveer Yoga website.

  1. Anju siwach

    Thank you sir

  2. Lata Sudhir Baisane

    धन्यवाद।

  3. Nisha bhardwaj

    Thanku sir ??

  4. Ujwala Kothawade

    Please differentiate muni tradition asanas and yogi traditional asanas

  5. आलोक कुमार पटवा

    ॐ गुरुदेव*

    आपका परम आभार ।

  6. Vikas jain

    Very nice sir…

    Please make detail videos on anatomy for ugc net preparation…It is very much needed..

    Thanks