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Hatha Pradipika

Hatha Pradipika Ch. 2 [36-37]

अध्याय 2: प्राणायाम

अध्याय परिचय

कपालभाति क्रिया व लाभ

मूल श्लोक · 2.36

भस्त्रावल्लोहकारस्य रेचपूरौ ससंभ्रमौ । कपालभातिर्विख्याता कफदोषविशोषणी ।। 36 ।।

भावार्थ

लोहार की धौकनी की तरह श्वास को तेज गति के साथ आवाज करते हुए अन्दर व बाहर करना कपालभाति कहलाता है । इसके अभ्यास से सभी प्रकार के कफ दोष नष्ट हो जाते हैं ।

विशेष

कपालभाति के बारे में लोगों के बीच बहुत सी भ्रान्त धारणाएँ बनी हुई हैं । हम यहाँ पर प्रयास करेंगे कि उन सभी का निदान कर पाएँ । कपालभाति को कुछ व्यक्ति प्राणायाम का अंग भी मानते हैं तो वहीं कुछ लोग इसे षट्कर्म का अंग मानते हैं । ये दोनों ही धारणाएँ अपने स्थान पर सही हैं । हठयोग आचार्यों की बात करें तो कपालभाति एक षटकर्म का अंग है । जिसकी अलग - अलग विधि का वर्णन हमें अलग- अलग ग्रन्थों में मिलता है । हठप्रदीपिका में कपालभाति की विधि अलग प्रकार से बताई गई है और इसके कोई अन्य प्रकार नहीं बताए हैं । वहीं घेरण्ड संहिता में कपालभाति की अलग विधि का वर्णन किया गया है और वहाँ पर उसके तीन प्रकार ( वातक्रम, व्युत्क्रम व शीतक्रम ) बताए हैं ।

इससे पता चलता है कि अलग - अलग विधि ही सही लेकिन हठयोग आचार्यों ने इसे शुद्धि क्रिया का अंग ही माना है । लेकिन आधुनिक युग की हम बात करें तो योग ऋषि स्वामी रामदेव ने कपालभाति को प्राणायाम के रूप में माना है । वह अपने प्राणायाम के क्रम का आरम्भ कपालभाति से ही शुरू करते हैं । उपर्युक्त कारणों से कपालभाति के बारे में बहुत सारी भ्रान्तियाँ लोगों के बीच बनी हुई हैं । अतः हठयोग आचार्यों ( स्वामी स्वात्माराम, महर्षि घेरण्ड ) के अनुसार कपालभाति एक शुद्धि क्रिया है और स्वामी रामदेव के अनुसार यह एक प्राणायाम का अंग है । इसके अलावा इन सभी के अनुसार कपालभाति की विधि भी अलग- अलग है ।

षट्कर्म से मोटापा, कफ व मल शुद्धि

मूल श्लोक · 2.37

षट्कर्मनिर्गतस्थौल्यकफदोषमलादिक: । प्राणायामं तत: कुर्यादनायासेन सिद्धयति ।। 37 ।।

भावार्थ

षट्कर्म के अभ्यास द्वारा मोटापा, कफ विकार, व शरीर के अन्य दोष आदि को दूर करने के बाद प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए । इस प्रकार प्राणायाम का अभ्यास करने से साधक को प्राणायाम में आसानी से सिद्धि प्राप्त हो जाती है ।

विशेष

प्राणायाम का अभ्यास षट्कर्म के बाद ही करने का निर्देश दिया गया है । ताकि प्राणायाम करते हुए सहजता से सिद्धि प्राप्त हो सके ।

Reader discussion

Comments (6)

These comments have been preserved from the original Dr. Somveer Yoga website.

  1. Lata Sudhir Baisane

    धन्यवाद।

  2. Neelam

    Very good information

  3. Anshu

    Prnam Aacharya ji ! DHNYAVAD OM,

  4. neetu

    Nice sir

  5. neetu

    Nice sir

  6. Nisha bhardwaj

    Thank you Sir ☺☺