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Hatha Pradipika

Hatha Pradipika Ch. 2 [21-23]

अध्याय 2: प्राणायाम

षट्कर्म का अभ्यास कौन करे ?

मूल श्लोक · 2.21

मेद:श्लेष्माधिक: पूर्वं षट्कर्माणि समाचरेत् । अन्यस्तु नाचरेत्तानि दोषाणां समभावत: ।। 21 ।।

भावार्थ

जिन व्यक्तियों के शरीर में चर्बी अर्थात मोटापा और कफ ज्यादा है उनको पहले आगे कही जाने वाली छ: शुद्धि क्रियाओं का अच्छे से अभ्यास करना चाहिए । इसके अलावा जिन व्यक्तियों के वात, पित्त व कफ नामक तीनों दोष सम अवस्था में हैं । उनको इन छ: शुद्धि क्रियाओं का अभ्यास नहीं करना चाहिए । या उनको इनके अभ्यास की कोई आवश्यकता नहीं है ।

षट्कर्म / छ: शुद्धि क्रियाएँ

मूल श्लोक · 2.22

धौतिर्बस्तिस्तथा नेति: त्राटकं नौलिकं तथा । कपालभातिश्चैतानि षट् कर्माणि प्रचक्षते ।। 22 ।।

भावार्थ

धौति, बस्ति, नेति, त्राटक, नौलि तथा कपालभाति इन छ: शुद्धि क्रियाओं को षट्कर्म कहा जाता है ।

क्रियाओं की गोपनीयता एवं महत्त्व

मूल श्लोक · 2.23

कर्मषट्कमिदं गोप्यं घटशोधनकारकम् । विचित्रगुणसंधायि पूज्यते योगिपुङ्गवै: ।। 23 ।।

भावार्थ

यह घट रूपी शरीर को शुद्ध करने वाली व आश्चर्यजनक परिणाम प्रदान करने वाली छ: शुद्धि क्रियाओं को गुप्त रखना चाहिए । इसीलिए योगी पुरुषों द्वारा इन सभी शुद्धि क्रियाओं का बहुत आदर- सम्मान किया जाता हैं ।

Reader discussion

Comments (7)

These comments have been preserved from the original Dr. Somveer Yoga website.

  1. Nisha bhardwaj

    Thanku sir ??

  2. Neelam

    Thank you sir

  3. आलोक कुमार पटवा

    ॐ गुरुदेव*

    आपका हृदय से आभार ।

  4. Lata Sudhir Baisane

    धन्यवाद।

  5. Devashree Marathe

    ॐ शांति. आको सहृदय से नमस्कार

  6. Devashree Marathe

    आपको गलती से आको हुआ है. माफ करना.

  7. ranjana chhabra

    thanku sir