सूर्यभेदी प्राणायाम वर्णन कथितं सहितं कुम्भं सूर्यभेदनकं श्रृणु । पूरयेत् सूर्यनाड्या च यथाशक्ति बहिर्मरुत् ।। 57 ।। धारयेद् बहुयत्नेन कुम्भकेन जलन्धरै: । यावत् स्वेदं नखकेशाभ्यां तावत्कुर्वतु कुम्भकम् ।। 58 ।। भावार्थ :- सहित कुम्भक का वर्णन किया जा चुका है । अब सूर्यभेदी प्राणायाम को सुनो – अपनी दायीं नासिका से बाहर की …
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