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Gheranda Samhita

Gheranda Samhita Ch. 7 [11-13]

अध्याय 7: समाधि

रसानन्दयोग समाधि वर्णन

मूल श्लोक · 7.11

साधनात् खेचरीमुद्रा रसनोर्ध्वंगता यदा । तदा समाधिसिद्धि: स्याद्धित्वा साधारणक्रियाम् ।। 11 ।।

भावार्थ

खेचरी मुद्रा की साधना ( अभ्यास ) करने पर साधक की जीभ ऊपर की ओर चली जाती है । जिसके परिणामस्वरूप साधक बिना किसी अन्य सामान्य क्रियाओं के ही समाधि को सिद्ध कर लेता है ।

इसे रसानन्दयोग समाधि कहा गया है ।

लयसिद्धि योग समाधि

मूल श्लोक · 7.12

योनिमुद्रां समासाद्य स्वयं शक्तिमयो भवेत् । सुश्रृङ्गाररसेनैव विहरेत् परमात्मनि ।। 12 ।।

मूल श्लोक · 7.13

आनन्दमय: समभूत्वा ऐक्यं ब्रह्मणि सम्भवेत् । अहं ब्रह्मेति चाद्वैतं समाधिस्तेन जायते ।। 13 ।।

भावार्थ

योनिमुद्रा के द्वारा साधक स्वयं को शक्तिशाली बनाकर परमात्मा के साथ प्रेमपूर्वक व्यवहार करे । आनन्दमय होकर ब्रह्मा के साथ एकीकरण का भावना करने से ‘मैं ही ब्राह्म हूँ’, इस प्रकार की अद्वैत ( एक ही भाव अथवा अभेद ) समाधि की प्राप्ति होती है ।

इसे लयसिद्धि योग समाधि कहते हैं ।

Reader discussion

Comments (3)

These comments have been preserved from the original Dr. Somveer Yoga website.

  1. Anshu

    Om Prnam Aacharya ji! Bhut bhut dhanyawad

  2. Aashish malhan

    Nice explain about two type of samadi dr sahab.

  3. आलोक कुमार पटवा

    ॐ गुरुदेव!

    आपको हृदय से आभार।