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  • Gheranda Samhita Ch. 7 [22-23]

तत्त्वं लयामृतं गोप्यं शिवोक्तं विविधानि च ।

तेषां संक्षेपमादाय कथितं मुक्तिलक्षणम् ।। 22 ।।

 

भावार्थ :-  इस समाधि रूपी गुप्त अमृत तत्त्व जिसकी विधि स्वयं भगवान शिव के द्वारा बताई गई है । मैंने उस समाधि के सभी लक्षणों को संक्षिप्त रूप में बता दिया है ।

 

 

इति ते कथितश्चण्ड! समाधिर्दुर्लभ: पर: ।

यं ज्ञात्वा न पुनर्जन्म जायते भूमिमण्डले ।। 23 ।।

 

भावार्थ :- हे चन्डकापालिक! यद्यपि यह समाधि रूपी श्रेष्ठ ज्ञान बहुत ही दुर्लभ ( कठिनता से प्राप्त होने वाला ) है । जिसका वर्णन मैंने तुम्हारे सामने किया है । जो भी साधक इसे जान लेता है । वह साधक जन्म- मरण के बंधन से पूरी तरह मुक्त हो जाता है अर्थात् उसका धरती पर दोबारा जन्म नहीं होता ।

 

 

 

विशेष :-  समाधि प्राप्ति का क्या फल अथवा लक्षण कहा गया है ? उत्तर है पुनर्जन्म मुक्ति अथवा जन्म- मरण के क्रम से मुक्ति ।

 

।। इति सप्तमोपदेश: समाप्त: ।।

 

इसी के साथ घेरण्ड संहिता का सातवां      अध्याय ( समाधि योग वर्णन ) समाप्त हुआ ।

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  1. बहुत बहुत धन्यवाद।आदरणीय आचार्यजी आपके प्रतिदिन के पोस्ट की बदौलत हम नित्य प्रति अपना अध्ययन कर पाए।

  2. ॐ गुरुदेव!
    आपने हम योगार्थियों के लिए
    इतना घनघोर व अथक परिश्रम
    किया । अस्तु आपके इस पुरुषार्थ को
    शत_ शत नमन ।

  3. ????????अतिउत्तम सर????☘
    मैंने आज अभी आपके द्वारा वर्णित सम्पूर्ण घेरण्ड संहिता पढ़ ली।
    अतिसुन्दर व्याख्या की गयी है आपके द्वारा।
    ????????????आपका बहुत बहुत धन्यवाद????????????

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