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Shrimad Bhagwad Geeta

Shrimad Bhagwad Geeta Ch. 3 [27-30]

अध्याय 3: कर्मयोग

मूल श्लोक · 3.27

प्रकृतेः क्रियमाणानि गुणैः कर्माणि सर्वशः । अहंकारविमूढात्मा कर्ताहमिति मन्यते ।। 27 ।।

व्याख्या

सम्पूर्ण कार्यों का आधार यह प्रकृति ही है, इसके गुणों ( सत्त्व, रज व तम ) द्वारा ही सभी कार्य सम्पन्न होते हैं, लेकिन कुछ अज्ञानी पुरुष अहंकार से प्रेरित होकर स्वयं को ही कर्ता ( यह कार्य मेरे द्वारा ही किया गया है ) समझने की भूल कर बैठते हैं ।

मूल श्लोक · 3.28

तत्त्ववित्तु महाबाहो गुणकर्मविभागयोः । गुणा गुणेषु वर्तन्त इति मत्वा न सज्जते ।। 28 ।।

व्याख्या

परन्तु हे महाबाहो अर्जुन ! जो व्यक्ति प्रकृति के गुण व कर्म के भेद ( अन्तर ) को अच्छी प्रकार से समझता है, वह इस बात को भी अच्छी प्रकार से जानता है कि प्रकृति के गुण ही गुणों पर क्रिया करते हैं । इसलिए वह कभी भी इन गुणों के प्रति आसक्ति का भाव नहीं रखता ।

विशेष

प्रकृति के गुण व कर्म के भेद को जानने के लिए पहले गुण को और फिर उसके कर्म को समझना होगा । प्रकृति के पञ्च महाभूत होते हैं, जो क्रमशः इस प्रकार हैं - आकाश, वायु, अग्नि, जल व पृथ्वी । इनको गुण कहते हैं । अब इनके कर्म विभाग को भी क्रमशः जानने का प्रयास करते हैं - शब्द, स्पर्श, रूप, रस व गन्ध । यह ऊपर वर्णित गुणों ( आकाश, वायु…. ) के कर्म विभाग कहे जाते हैं । शब्द की उत्पत्ति का आधार आकाश, स्पर्श का वायु, रूप का अग्नि, रस का जल व गन्ध का पृथ्वी माने गए हैं ।

अतः यह गुण ही गुणों पर क्रिया करते रहते हैं, लेकिन हम अज्ञान व अहंकार के वशीभूत होकर स्वयं को कर्ता समझने की भूल कर बैठते हैं, जबकि प्रकृति ही सभी कार्यों आधार है ।

मूल श्लोक · 3.29

प्रकृतेर्गुणसम्मूढ़ाः सज्जन्ते गुणकर्मसु । तानकृत्स्नविदो मन्दान्कृत्स्नविन्न विचालयेत्‌ ।। 29 ।।

मूल श्लोक · 3.30

मयि सर्वाणि कर्माणि सन्नयस्याध्यात्मचेतसा । निराशीर्निर्ममो भूत्वा युध्यस्व विगतज्वरः ।। 30 ।।

व्याख्या

अज्ञानता से वशीभूत होकर प्रकृति के गुणों में आसक्त हुए मन्दबुद्धि अथवा कम बुद्धि वाले व्यक्तियों को तत्त्वज्ञानी व्यक्ति कहीं किसी प्रकार के सन्देह में डालकर विचलित न कर दे ।

इसलिए हे अर्जुन ! तुम अध्यात्म बुद्धि का आश्रय लेकर इच्छा, ममता व सन्ताप का त्याग करते हुए अपने सभी कर्मों को मुझमें समर्पित करके, चिन्ता मुक्त होकर युद्ध करो ।

Reader discussion

Comments (2)

These comments have been preserved from the original Dr. Somveer Yoga website.

  1. Aashish malhan

    Guru ji nice explain about tension free condition and all throught give to god.

  2. Alok kumar Patwa

    ॐ गुरुदेव!

    आपका हृदय से आभार।