सत्त्वपुरुषयो: शुद्धिसाम्ये कैवल्यमिति ।। 55 ।।

 

 

शब्दार्थ :- सत्त्व ( बुद्धि ) पुरुषयो: ( पुरुष या जीवात्मा की ) शुद्धि ( शुद्धि ) साम्ये ( समान रूप से हो जाती है ) इति ( यह ) कैवल्य ( मोक्ष या मुक्ति होती है )

 

 

सूत्रार्थ :- जब बुद्धि और जीवात्मा की समान रूप से शुद्धि हो जाती है । तब वह कैवल्य या मोक्ष की अवस्था कहलाती है ।

 

 

व्याख्या :-  यह विभूतिपाद का अन्तिम सूत्र है । इसमें योगी की कैवल्य अथवा मोक्ष की अवस्था के लक्षण को बताया गया है ।

 

यहाँ पर बुद्धि और पुरुष की शुद्धि की बात कही गई है । अब प्रश्न उठता है कि बुद्धि और पुरुष की शुद्धि कैसे होती है ? उसके क्या- क्या लक्षण होते हैं ?

 

जब तक हमारी बुद्धि में रजोगुण व तमोगुण का प्रभाव रहता है तब तक वह सत्त्वगुण में प्रवृत्त नहीं हो पाती है । जिसके कारण वह क्लेशों से परिपूर्ण रहती है । लेकिन जैसे ही हमारी बुद्धि रजोगुण व तमोगुण से रहित होकर केवल सत्त्वगुण से युक्त हो जाती है ।

 

वैसे ही उसके सभी क्लेश दग्धबीज अर्थात कभी भी न उत्पन्न होने वाली अवस्था को प्राप्त हो जाते हैं । यह बुद्धि की निर्मल अवस्था होती है । इसी अवस्था में बुद्धि को इस बात की अनुभूति ( अहसास ) होती है कि वह पुरुष अर्थात जीवात्मा से अलग है ।

 

इस प्रकार बुद्धि के सत्त्वगुण प्रधान होने से पुरुष भी सभी मलों अर्थात विकारों से रहित शुद्ध, निर्मल व निर्विकार हो जाता है । इस प्रकार बुद्धि व पुरुष की समान रूप से शुद्धि हो जाती है ।

 

अब इस अवस्था में योगी के लिए कोई भी भोग या ज्ञान प्राप्त करने योग्य नहीं रहता । अर्थात अब न ही तो उसे किसी तरह के भोग की आवश्यकता होती है और न ही किसी प्रकार के ज्ञान की ।

 

योगी के क्लेशों दग्धबीज होने से सभी कर्मफलों की समाप्ति हो जाती है । और विवेक ज्ञान से योगी साधक की सभी भ्रान्तियाँ दूर हो जाती हैं । जिससे वह अपने वास्तविक स्वरूप में स्थित हो जाता है ।

 

कैवल्य को मोक्ष, समाधि, मुक्ति, निवार्ण आदि उपनामों से भी सम्बोधित किया जाता है । अर्थात यह सभी नाम कैवल्य के समानार्थी हैं ।

 

इसी सूत्र के साथ विभूतिपाद समाप्त होता है । अगले कैवल्य पाद में कैवल्य के स्वरूप का विस्तृत वर्णन किया गया है ।

 

    ।। इति विभूतिपाद: समाप्त: ।।

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  1. ॐ गुरुदेव*
    मोक्ष की अवस्था के लक्षण का अति सुन्दर वर्णन प्रस्तुत किया है आपने। आपको हृदय से परम आभार।

  2. guru ji bahut badhiya kam kiya hai aapne, dhanayad

    mera ek observation tha Gherand sahita ke parichaya me aapne neti karma 2 bataye hai jabki, gherand sahita me keval sutra neti ke bare me bataya hai, if i not wrong

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