नाभिचक्रे कायव्यूहज्ञानम् ।। 29 ।। शब्दार्थ :- नाभिचक्रे ( पेट के बीच में स्थित नाभि प्रदेश के अन्दर संयम करने से ) काय ( शरीर की ) व्यूह ( संरचना का ) ज्ञानम् ( ज्ञान हो जाता है ) सूत्रार्थ :- पेट के बीच में स्थित नाभि प्रदेश के मध्य में संयम करने …
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