सातवां अध्याय ( ज्ञान- विज्ञान योग ) सातवें अध्याय में योगीराज श्रीकृष्ण अर्जुन को कहते हैं कि इस ब्रह्म ज्ञान को जानने के बाद कोई भी ऐसा ज्ञान शेष नहीं बचता है जिसे जानना जरूरी हो । इसमें कुल तीस ( 30 ) श्लोकों का वर्णन किया गया है । यहाँ पर परब्रह्ना की मुख्य

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Geeta Introduction – 7

आठवां अध्याय ( अक्षर ब्रह्म योग ) अक्षरब्रह्म योग नामक आठवें अध्याय में कुल अठाइस ( 28 ) श्लोकों का वर्णन किया गया है । इस अध्याय की शुरुआत में ही अर्जुन श्रीकृष्ण से अनेक प्रश्न पूछता है । जिनमें वह कहता है कि ब्रह्म क्या है ? अध्यात्म क्या है ? कर्म क्या है

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Geeta Introduction – 8

नौवां अध्याय ( राजविद्या- राजगुह्ययोग ) इस अध्याय में कुल चौतीस ( 34 ) श्लोकों के द्वारा राजगुह्य योग का वर्णन किया गया है । राजगुह्य योग की उपयोगिता को बताते हुए श्रीकृष्ण कहते हैं कि इस योग को जानने से व्यक्ति सभी पापों से मुक्त हो जाता है । इसे सभी विद्याओं का राजा

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Geeta Introduction – 9

दसवां अध्याय ( विभूतियोग ) जिस प्रकार अध्याय के नाम से ही विदित होता है कि इसमें भगवान की विभूतियों का वर्णन किया गया है । इसमें कुल बयालीस ( 42 ) श्लोक कहे गए हैं । जब अर्जुन प्रश्न करता है कि हे जनार्दन ! आप उन सभी विभूतियों का विस्तार से वर्णन करो

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Geeta Introduction – 10

ग्यारहवां अध्याय ( विश्वरूपदर्शनयोग ) इस अध्याय में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को अपने विराट स्वरूप के दर्शन करवाने का वर्णन किया गया है । अभी तक अर्जुन श्रीकृष्ण के साथ अनेक तर्क- वितर्क कर रहा था । उसे श्रीकृष्ण के इस दिव्य शक्ति का अनुमान नहीं था । जब श्रीकृष्ण अपनी महिमा के विषय में

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Geeta Introduction – 11

बारहवां अध्याय ( भक्तियोग ) इस अध्याय में सच्चे भक्त के गुणों का वर्णन किया गया है साथ ही श्रीकृष्ण बताते हैं कि उनको किस प्रकार का भक्त सबसे अधिक प्रिय है ? इस अध्याय में कुल बीस ( 20 ) श्लोकों का ही वर्णन किया गया है । सर्वप्रथम अर्जुन पूछता है कि जो

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Geeta Introduction – 12

तेरहवां अध्याय ( क्षेत्र-क्षेत्रज्ञविभागयोग ) इस अध्याय में मुख्य रूप से क्षेत्र ( शरीर ) व क्षेत्रज्ञ ( आत्मा ) के स्वरूप का वर्णन कुल चौतीस ( 34 ) श्लोकों के माध्यम से किया गया है । सबसे पहले श्रीकृष्ण क्षेत्र व क्षेत्रज्ञ को समझाते हुए कहते हैं कि इस शरीर को क्षेत्र व आत्मा

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Geeta Introduction – 13