बीज स्थापना ( गर्भ स्थापना ) सर्वयोनिषु कौन्तेय मूर्तयः सम्भवन्ति याः । तासां ब्रह्म महद्योनिरहं बीजप्रदः पिता ।। 4 ।। व्याख्या :- हे कौन्तेय ! सभी योनियों में जितने भी मूर्त रूप ( शरीरधारी ) प्राणी जन्म लेते हैं, उनकी ब्रह्म रूप प्रकृति योनि है और मैं उस योनि में बीज की …
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- Category: Bhagwad Geeta








