आसन की स्थिर स्थिति समं कायशिरोग्रीवं धारयन्नचलं स्थिरः । सम्प्रेक्ष्य नासिकाग्रं स्वं दिशश्चानवलोकयन् ।। 13 ।। प्रशान्तात्मा विगतभीर्ब्रह्मचारिव्रते स्थितः । मनः संयम्य मच्चित्तो युक्त आसीत मत्परः ।। 14 ।। व्याख्या :- अपने शरीर को आसन में स्थिर करके, कमर ( पीठ ), गर्दन व सिर को बिलकुल सीधी रखते हुए, अपनी …
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- Category: Bhagwad Geeta








