ततः प्रत्यक्चेतनाधिगमोऽप्यन्तरायाभावश्च ।। 29 ।।   शब्दार्थ :- तत:, ( तब उस ओ३म् नाम के जप से ) प्रत्यक् – चेतन – अधिगम:, ( अन्तरात्मा के वास्तविक स्वरूप के ज्ञान का आगमन होता है ) च ( और ) अन्तराय, ( विघ्न या बाधाओं की ) अभाव, ( समाप्ति ) अपि, ( भी हो जाती

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Yoga Sutra – 29

व्याधिस्त्यानसंशयप्रमादालस्यावि रतिभ्रान्तिदर्शनालब्धभूमिकत्वानवस्थितत्वानि चित्तविक्षेपास्तेऽन्तराया: ।। 30 ।।   शब्दार्थ :- व्याधि, ( रोग या बीमारी ) स्त्यान, ( अकर्मण्यता अथवा काम से मन चुराना ) संशय, ( आशंका या सन्देह ) प्रमाद, ( लापरवाही ) आलस्य, ( सुस्ती ) अविरति, ( विषयों में राग अथवा भोगों में आसक्ति ) भ्रान्तिदर्शन, ( विपरीत ज्ञान या गलत जानकारी

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Yoga Sutra -30

दुःखदौर्मनस्याङ्गमेजयत्वश्वासप्रश्वासा विक्षेपसहभुव: ।। 31 ।।   शब्दार्थ :- दुःख, ( दुःख ) दौर्मनस्य, ( इच्छापूर्ति न होने से उत्पन्न क्षोभ ) अङ्गमेजयत्व, ( शरीर के अंगों में कंपन होना ) श्वास, ( इच्छा के विरुद्ध प्राणवायु का अन्दर आना ) प्रश्वास, ( इच्छा के विरुद्ध प्राणवायु का बाहर निकलना ) विक्षेपसहभुव: ( पूर्व वर्णित विघ्नों

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Yoga Sutra – 31

तत्प्रतिषेधार्थमेकतत्त्वाभ्यास: ।। 32 ।।   शब्दार्थ :- तत् , ( उन ) प्रतिषेधार्थम् , ( विघ्नों के दूर करने या उनके नाश के लिए ) एकतत्त्वाभ्यास: ( एक तत्त्व का अभ्यास करना चाहिए ।)   सूत्रार्थ :- उन पूर्व में कहे गए योगमार्ग के विघ्नों या बाधाओं को दूर करने या उनका नाश करने के

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Yoga Sutra – 32

मैत्रीकरुणामुदितोपेक्षाणां सुखदुःखपुण्यापुण्यविषयाणां भावनातश्चित्तप्रसादनम् ।। 33 ।।   शब्दार्थ :-  सुख, ( सुख या आनन्द ) दुःख ( कष्ट या पीड़ा ) पुण्य, ( धर्मात्मा या धार्मिक ) अपुण्य, ( पापात्मा या पापी ) विषयाणां, ( विषय या प्रकृति वाले व्यक्तियों में क्रमशः ) मैत्री, ( मित्रता या दोस्ती ) करुणा, ( कृपा या अनुकम्पा )

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Yoga Sutra – 33

प्रच्छर्दनविधारणाभ्यां वा प्राणस्य ।। 34 ।।   शब्दार्थ :- वा, ( अथवा / या ) प्राणस्य, ( प्राण, प्राणवायु अथवा श्वास को ) प्रच्छर्दनविधारणाभ्यां, ( बार – बार बाहर निकालने और बाहर ही रोकने के अभ्यास से भी )   सूत्रार्थ :-   नासिका के द्वारा बार – बार प्राणवायु को बाहर छोड़कर उसे बाहर ही

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Yoga Sutra – 34

विषयवती वा प्रवृत्तिरुत्पन्ना मनस: स्थितिनिबंधनी ।। 35 ।।   शब्दार्थ :- विषयवती, ( शब्द, स्पर्श, रूप, रस व गन्ध विषयों वाली ) वा, ( या ) प्रवृति, ( अनुभूति से )  उत्पन्ना, ( उत्पन्न या पैदा हुई ) मनस:, ( मन की ) स्थिति, ( अवस्था को )  निबंधनी, ( एक जगह पर बाँधने वाली

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Yoga Sutra – 35