सत्यप्रतिष्ठायां क्रियाफलाश्रयत्वम् ।। 36 ।। शब्दार्थ :- सत्य- प्रतिष्ठायां ( सत्य अर्थात सच के सिद्ध हो जाने पर ) क्रियाफल-आश्रयत्वम् ( योगी के कहे हुए कथनों या वचनों के फल का प्रभाव अन्यों या दूसरों के ऊपर भी पड़ता है । ) सूत्रार्थ :- जब योगी मन, वचन व कर्म से सत्य को …
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