प्रसंख्यानेऽप्यकुसीदस्य सर्वथा विवेकख्यातेर्धर्ममेघ: समाधि: ।। 29 ।। शब्दार्थ :- प्रसंख्याने ( बुद्धि व आत्मा की भिन्नता का ज्ञान अर्थात विवेकख्याति के प्राप्त होने पर ) अपि ( भी ) अकुसीदस्य ( सिद्धियों या विभूतियों में वैराग्य उत्पन्न हो जाता है ) सर्वथा ( पूरी तरह से ) विवेकख्याते: ( विवेकख्याति के प्राप्त होने …
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