सीत्कारी प्राणायाम विधि व लाभ सीत्कां कुर्यात्ततथा वक्त्रे घ्राणेनैव विजृम्भिकाम् । एवमभ्यासयोगेन कामदेवो द्वितीयक: ।। 54 ।। भावार्थ :- मुख से सीत्कार अर्थात सी-सी की ध्वनि करते हुए वायु को अन्दर भरें और रेचक अर्थात श्वास को बाहर हमेशा नासिका से ही निकालना चाहिए । इस प्रकार के योग का अभ्यास करने से …
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- Category: hatha pradipika 2








