ततोऽणिमादिप्रादुर्भाव: कायसम्पत्तद्धर्मानभिघातश्च ।। 45 ।। शब्दार्थ :- तत: ( उस अर्थात उन भूतों पर विजय प्राप्त करने पर ) अणिमादि ( अणिमा आदि सिद्धियाँ ) प्रादुर्भाव: ( प्रकट होती हैं ) काय ( शरीर ) सम्पत् ( सामर्थ्यवान अर्थात बलवान होता है ) च ( और ) तद्- धर्म ( तब उन भूतों के …
स्थूलस्वरूपसूक्ष्मान्वयार्थवत्त्वसंयमाद् भूतजय: ।। 44 ।। शब्दार्थ :- स्थूल ( जिसका कोई आकार हो या कोई ठोस पदार्थ ) स्वरूप ( लक्षण या उनकी विशेषता ) सूक्ष्म ( जिसे ठोस रूप में या प्रत्यक्ष रूप से न देखा जाए ) अन्वय ( अति सूक्ष्म या उत्पत्ति का आधार ) अर्थवत्त्व ( उद्देश्य या प्रयोजन ) …
बहिरकल्पितावृत्तिर्महाविदेहा तत: प्रकाशावरणक्षय: ।। 43 ।। शब्दार्थ :- बहिरकल्पिता ( शरीर के साथ सम्बन्ध रहते हुए बाहर के ) वृत्ति: ( पदार्थों में वृत्ति अर्थात व्यापार का होना ) महाविदेहा ( महाविदेहा नामक धारणा है ) तत: ( उसके द्वारा ) प्रकाश ( प्रकाश अर्थात ज्ञान पर पड़ा ) आवरण ( पर्दा ) क्षय: …
कायाकाशयो: सम्बन्ध संयमाल्लघुतूलसमापत्तेश्चाकाशगमनम् ।। 18 ।। शब्दार्थ :- काय ( शरीर व ) आकाशयो: ( आकाश के ) सम्बन्ध ( आपसी सम्बन्ध में ) संयमात् ( संयम करने से ) च ( और ) लघु ( छोटे अथवा हल्के ) तूल ( रुई आदि पदार्थों या वस्तुओं में संयम करने से ) समापत्ते: ( …
श्रोत्राकाशयो: सम्बन्धसंयमाद् दिव्यं श्रोत्रम् ।। 17 ।। शब्दार्थ :- श्रोत्र ( कान और ) आकाशयो: ( आकाश ) सम्बन्ध ( दोनों के आपसी सम्बन्ध में ) संयमात् ( संयम करने से ) श्रोत्रम् ( दोनों कानों में ) दिव्यं ( दिव्यता अर्थात सूक्ष्म शब्दों को सुनने की क्षमता आती है ) सूत्रार्थ …
