विशोका वा ज्योतिष्मती ।। 36 ।। शब्दार्थ :- वा, ( इसके अलावा ) विशोका, ( शोक से रहित ) ज्योतिष्मती, ( प्रकाशित करने वाली ) प्रवृत्ति भी मन को स्थिर करने वाली होती है । सूत्रार्थ :- इसके अतिरिक्त शोक से रहित प्रकाशशील प्रवृत्ति भी मन को एकाग्र करने वाली होती है । …
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- Category: Samadhi Paad








