विशोका वा ज्योतिष्मती ।। 36 ।।   शब्दार्थ :- वा, ( इसके अलावा ) विशोका, ( शोक से रहित ) ज्योतिष्मती, ( प्रकाशित करने वाली ) प्रवृत्ति भी मन को स्थिर करने वाली होती है ।   सूत्रार्थ :- इसके अतिरिक्त शोक से रहित प्रकाशशील प्रवृत्ति भी मन को एकाग्र करने वाली होती है ।

Read More
Yoga Sutra – 36

वीतरागविषयं वा चित्तम्  ।। 37 ।।   शब्दार्थ :- वा, ( इसके अतिरिक्त ) वीतराग, ( ऐसे योगी जिनके राग व द्वेष समाप्त हो चुके हैं ) विषयं, ( उनके चरित्र का अनुसरण करने से ) भी साधक का चित्त स्थिर होता है ।   सूत्रार्थ :- इसके अलावा ऐसे योगी साधक जिनके राग –

Read More
Yoga Sutra – 37

स्वप्ननिद्राज्ञानालम्बनं वा ।। 38 ।।   शब्दार्थ :- वा, ( अथवा ) स्वप्न, ( सोते हुए आने वाला सपना ) निद्रा, ( नींद ) ज्ञान, ( किसी वस्तु या किसी विषय के स्वरूप को जानना या उसकी जानकारी होना ) आलम्बनम् , ( सहारा या आश्रय लेना )   सूत्रार्थ :- स्वप्न और निद्रा के

Read More
Yoga Sutra – 38

यथाभिमतध्यानाद्वा ।। 39 ।।   शब्दार्थ :- वा, ( या ) यथाभिमत, ( जो जैसा मानता हो या जो अपने अनुसार जैसा समझे ) ध्यानत् ( उसी के ध्यान से भी )   सूत्रार्थ :- या इसके बावजूद जो व्यक्ति जैसा जानता है या जिसे उपयुक्त मानता है । उसे उसी का ध्यान करना चाहिए

Read More
Yoga Sutra – 39

परमाणुपरममहत्त्वान्तोऽस्य वशीकार: ।। 40 ।।   शब्दार्थ :- परमाणु, ( अति सूक्ष्म या छोटे से छोटा ) परममहत्त्वान्त:, ( अति दीर्घ या बड़े से बड़ा आकाश जितना ) अस्य, ( इसका ) वशीकार:, ( पूर्ण नियंत्रण हो जाता है । )   सूत्रार्थ :-  इस चित्त का छोटे से छोटे अर्थात अणु जितनी छोटी वस्तु

Read More
Yoga Sutra – 40

क्षीणवृत्तेरभिजातस्येव मणे र्ग्रहीतृग्रहणग्राह्येषु तत्स्थतदञ्जनता समापत्ति: ।। 41 ।।   शब्दार्थ :- क्षीणवृत्ते, ( जिसकी राजसिक व तामसिक वृत्तियाँ अत्यंत कमजोर या शान्त हो गई हैं ) अभिजातस्य, ( अति उत्तम प्रकार की )  मणे, ( स्फटिक मणि ) इव, ( के समान या के जैसी ) ग्रहीतृ, ( ग्रहण अर्थात प्राप्त करने वाला यानी जीवात्मा

Read More
Yoga Sutra – 41

तत्र शब्दार्थज्ञानविकल्पै: संकीर्णा सवितर्का समापत्ति: ।। 42 ।।   शब्दार्थ :- तत्र, ( उनमें अर्थात समापत्तियों में ) शब्द, ( शब्द अर्थात जो हम बोलते हैं ) अर्थ, ( बोले हुए शब्द का मतलब और ) ज्ञान, ( उसकी सही जानकारी के ) विकल्पै:, ( प्रकारों से ) संकीर्णा, ( युक्त या मिली हुई )

Read More
Yoga Sutra – 42