परिणामतापसंस्कारदुःखैर्गुणवृत्तिविरोधाच्च दुःखमेव सर्वं विवेकिन: ।। 15 ।। शब्दार्थ :- परिणाम दुःख, ( भौतिक सुखों को भोगने के बाद राग से उत्पन्न दुःख ) ताप दुःख, ( सुख में बाधा डालने वाले के प्रति द्वेष करने से उत्पन्न दुःख ) संस्कार दुःख, ( सुख व दुःख के संस्कार बनने से सुख की इच्छा पूरी न …
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- Category: Sadhan Paad








