चित्तेरप्रतिसङ्क्रमायास्तदाकारापत्तौ स्वबुद्धिसंवेदनम् ।। 22 ।। शब्दार्थ :- चित्ते: ( चेतन आत्मा अथवा पुरुष ) अप्रतिसंक्रमाया: ( किसी भी प्रकार की क्रिया व किसी भी प्रकार के संक्रमण अर्थात सङ्ग से रहित है ) तदाकार ( विषय को ग्रहण किए हुए चित्त से ) आपत्तौ ( सम्पर्क या सम्बन्ध होने से ) स्वबुद्धि ( उसे …
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