मूलशोधन धौति अपानक्रूरता तावद्या वन्मूलं न शोधयेत् । तस्मात् सर्वप्रयत्नेन मूलशोधनमाचरेत् ।। 43 ।। भावार्थ :- जब तक शरीर के मूल भाग की शुद्धि नहीं होती तब तक शरीर में अपान वायु ( अपान नामक प्राण जो गुदा प्रदेश में स्थित होता है ) का प्रकोप ( असन्तुलन ) बना रहता है । …
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