गुणातीत होने के उपाय मां च योऽव्यभिचारेण भक्तियोगेन सेवते । स गुणान्समतीत्येतान्ब्रह्मभूयाय कल्पते ।। 26 ।। ब्रह्मणो हि प्रतिष्ठाहममृतस्याव्ययस्य च । शाश्वतस्य च धर्मस्य सुखस्यैकान्तिकस्य च ।। 27 ।। व्याख्या :- जो पुरुष अपने सभी कर्मों को मुझमें समर्पित कर, भक्तियोग से परिपूर्ण होकर मेरी सेवा करता है अथवा मेरा भजन …
गुणानेतानतीत्य त्रीन्देही देहसमुद्भवान् । जन्ममृत्युजरादुःखैर्विमुक्तोऽमृतमश्नुते ।। 20 ।। व्याख्या :- जो पुरुष शरीर में उत्पन्न तीनों गुणों से रहित होकर अथवा इन तीनों गुणों का आश्रय लिए बिना ही व्यवहार करता है, वह जन्म, मृत्यु और बुढ़ापा आदि दुःखों से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त कर लेता है । विशेष …
कर्मों के फल कर्मणः सुकृतस्याहुः सात्त्विकं निर्मलं फलम् । रजसस्तु फलं दुःखमज्ञानं तमसः फलम् ।। 16 ।। व्याख्या :- सात्त्विक अथवा शुभ कर्मों का फल सात्त्विक और पवित्र, राजसिक कर्मों का फल दुःख और तामसिक कर्मों का फल अज्ञान होता है । विशेष :- सात्त्विक व पवित्र फल किन …
तमोगुण का शरीर पर प्रभाव अप्रकाशोऽप्रवृत्तिश्च प्रमादो मोह एव च । तमस्येतानि जायन्ते विवृद्धे कुरुनन्दन ।। 13 ।। व्याख्या :- हे कुरुनन्दन अर्जुन ! शरीर में तमोगुण की वृद्धि होने पर व्यक्ति में अज्ञान का अन्धकार, कर्तव्य कर्मों में अरुचि, प्रमाद ( लापरवाही ), और मोह बढ़ता है । …
एक गुण की प्रधानता रजस्तमश्चाभिभूय सत्त्वं भवति भारत । रजः सत्त्वं तमश्चैव तमः सत्त्वं रजस्तथा ।। 10 ।। व्याख्या :- हे भारत ! रजोगुण और तमोगुण को दबाकर सत्त्वगुण प्रधान हो जाता है, सत्त्वगुण और तमोगुण को दबाकर रजोगुण प्रधान हो जाता है तथा सत्त्वगुण और रजोगुण को दबाकर तमोगुण प्रधान …
