तद्वैराग्यादपि दोषबीजक्षये कैवल्यम् ।। 50 ।। शब्दार्थ :- तद् ( तब उस सिद्धि अर्थात विशोका नामक सिद्धि से ) अपि ( भी ) वैराग्यात् ( वैराग्य हो जाने पर ) दोष ( दोष या अविद्या आदि क्लेशों के ) बीज ( बीजों का ) क्षये ( नाश होने से ) कैवल्य ( मोक्ष की …
- Home
- |
- Category: Vibhuti Paad








