सोपक्रमं निरुपक्रमं च कर्म तत्संयमादपरान्तज्ञानमरिष्टेभ्यो वा ।। 22 ।। शब्दार्थ :- सोपक्रमम् ( शीघ्र ही परिणाम या फल देने वाले कार्य ) च ( और ) निरूपक्रमम् ( देरी से परिणाम या फल देने वाले कार्य ) कर्म ( दो प्रकार के कार्य होते हैं ) तत् ( उन कर्मों में ) संयमात् ( …
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- Category: Vibhuti Paad








