तदभावात्संयोगाभावो हानं तद् दृशे: कैवल्यम् ।। 25 ।। शब्दार्थ :- तद्, ( उस अविद्या का ) अभावत्, ( अभाव होने से ) संयोग, ( उस दृश्य व दृष्टा के संयोग का भी ) आभव:, ( अभाव हो जाता है ) हानं, ( दुःख से निवृत्ति या दुःख का अभाव ) तत्, ( वही ) …
तस्य हेतुरविद्या ।। 24 ।। शब्दार्थ :- तस्य, ( उसका अर्थात प्रकृत्ति व पुरुष के संयोग का ) हेतु:, ( कारण ) अविद्या, ( वह अविद्या अर्थात मिथ्याज्ञान ही है । ) सूत्रार्थ :- उस प्रकृत्ति व पुरुष के संयोग का कारण वह अविद्या रूपी क्लेश ही है । व्याख्या :- इस …
स्वस्वामिशक्त्यो: स्वरूपोपलब्धिहेतु: संयोग: ।। 23 ।। शब्दार्थ :- स्व शक्त्यो:, ( प्रकृत्ति ) स्वामि शक्त्यो:, ( पुरुष ) स्वरूपोपलब्धि, ( स्वरूप की प्राप्ति का ) हेतु:, ( कारण ही ) संयोग:, ( संयोग अर्थात जुड़ाव है । ) सूत्रार्थ :- प्रकृत्ति और उस पुरूष के स्वरूप की प्राप्ति के लिए ही इनका संयोग अर्थात …
कृतर्थं प्रति नष्टमप्यनष्टं तदन्यसाधारणत्वात् ।। 22 ।। शब्दार्थ :- कृतार्थं, ( मुक्ति अथवा मोक्ष प्राप्त कर चुका पुरूष ) प्रति, ( के लिए ) नष्टम्, ( नष्ट अर्थात खत्म हुई ) अपि, ( भी ) अनष्टम्, ( कभी नष्ट या खत्म न होने वाली ) तद् -अन्य, ( उससे अर्थात मुक्त पुरूष से भिन्न …
तदर्थ एव दृश्यस्यात्मा ।। 21 ।। शब्दार्थ :- दृश्यस्य, ( दृश्य रूप प्रकृत्ति का ) आत्मा, ( स्वरूप ) एव, ( ही ) तदर्थ, ( उसके अर्थात दृष्टा के लिए हुआ है । ) सूत्रार्थ :- उस दृश्य रूप प्रकृत्ति का स्वरूप उस पुरूष के लिए ही है । उसका और कोई प्रयोजन …
