तस्य प्रशान्तवाहिता संस्कारात् ।। 10 ।। शब्दार्थ :- संस्करात् ( संस्कारों के प्रभाव से ) तस्य ( उसकी अर्थात चित्त की ) वाहिता ( स्थिति या अवस्था ) प्रशान्त ( बिलकुल शान्त होती है । ) सूत्रार्थ :- संस्कारो के प्रभाव से चित्त की स्थिति बिलकुल शान्त हो जाती है । अर्थात उस …
व्युत्थाननिरोधसंस्कारयोरभिभवप्रादुर्भावौ निरोधक्षणचित्तान्वयो निरोध परिणाम: ।। 9 ।। शब्दार्थ :- व्युत्थान ( चित्त की वह अवस्था जिसमें संस्कार प्रभावी होते हैं । ) निरोध ( वह अवस्था जिसमें संस्कार दब जाते हैं । ) संस्कारयो: ( विचार या घटनाओं की स्मृति या याददाश्त ) अभिभव ( छिपना या दबना ) प्रादुर्भावौ ( उभरना या प्रकट …
तदपि बहिरङ्गं निर्बीजस्य ।। 8 ।। शब्दार्थ :- तदपि ( वह भी अर्थात धारणा, ध्यान व समाधि भी ) निर्बीजस्य ( निर्बीज अथवा असम्प्रज्ञात समाधि के ) बहिरङ्गं ( बाहरी साधन हैं । ) सूत्रार्थ :- वह धारणा, ध्यान व समाधि भी निर्बीज अथवा असम्प्रज्ञात समाधि के बाहरी साधन हैं । व्याख्या …
त्रयमन्तरङ्गं पूर्वेभ्य: ।। 7 ।। शब्दार्थ :- पूर्वेभ्य: ( पूर्व अर्थात पहले कहे गए की अपेक्षा ) त्रयम् ( ये तीन अर्थात धारणा, ध्यान व समाधि ) अन्तरङ्गंम् ( अन्तरङ्ग अर्थात ज्यादा निकट हैं । ) सूत्रार्थ :- पहले कहे गए ( यम, नियम, आसन, प्राणायाम व प्रत्याहार की अपेक्षा ) यह तीन …
तस्य भूमिषु विनियोगः ।। 6 ।। शब्दार्थ :- तस्य ( उसका अर्थात संयम का ) भूमिषु ( योग की भूमियों या अवस्थाओं में ) विनियोग: ( उपयोग या प्रयोग करना चाहिए । ) सूत्रार्थ :- संयम का प्रयोग योग की अलग- अलग भूमियों या अवस्थाओं में करना चाहिए । अर्थात योगी साधक को …
