हठप्रदीपिका का संक्षिप्त परिचय हठप्रदीपिका और हठयोग को एक दूसरे का पर्यायवाची कहा जाये, तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी । हठयोग की कोई भी चर्चा बिना हठप्रदीपिका के पूर्ण नहीं होती । यौगिक ग्रन्थों में इसका स्थान अतुल्यनीय है । हठयोग के इस अनुपम ग्रन्थ के रचयिता स्वामी स्वात्माराम हैं । हठप्रदीपिका की उपयोगिता का …
पुरुषार्थशून्यानां गुणानां प्रतिप्रसव: कैवल्यं स्वरूपप्रतिष्ठा वा चितिशक्तिरिति ।। 34 ।। शब्दार्थ :- पुरुषार्थ ( जीवन के प्रयोजन या लक्ष्य से ) शून्यानां ( शून्य अर्थात रहित हुए ) गुणानाम् ( गुणों का ) प्रतिप्रसव: ( अपने कारण में लीन अर्थात वापिस मिल जाना ही ) कैवल्यम् ( कैवल्य अर्थात मुक्ति है ) वा ( …
क्षणप्रतियोगी परिणामापरान्तनिर्ग्राह्य: क्रम: ।। 33 ।। शब्दार्थ :- क्षण ( पलों के ) प्रतियोगी ( समूह पर आधारित व ) परिणाम ( उसके परिणाम अथवा फल के ) अपरान्त ( समाप्त होने या बन्द होने पर ) निर्ग्राह्य: ( जिसको जाना जाता है ) क्रम: ( वही क्रम कहलाता है ) सूत्रार्थ :- पलों …
तत: कृतार्थानां परिणामक्रमसमाप्तिर्गुणानाम् ।। 32 ।। शब्दार्थ :- तत: ( उसके अर्थात धर्ममेघ समाधि के प्राप्त होने के पश्चात ) कृतार्थानाम् ( अपने सभी भोग व अपवर्ग रूपी कार्यों के पूरा करने वाले ) गुणानाम् ( गुणों के ) परिणामक्रम ( परिणामों के क्रम अर्थात उनके उत्पत्ति क्रमों की ) समाप्ति: ( समाप्ति …
तदा सर्वावरणमलापेतस्य ज्ञानस्यानन्त्याज्ज्ञेयमल्पम् ।। 31 ।। शब्दार्थ :- तदा ( तब अर्थात क्लेशों व सकाम कर्मों के समाप्त होने पर ) सर्व ( सभी ) आवरण ( ढके हुए ) मल ( अज्ञान रूपी मल अर्थात गन्दगी ) अपेतस्य ( हट चुके हैं या दूर हो चुके हैं ) ज्ञानस्य ( ऐसे विशुद्ध ज्ञान …
