हृदय धौति के प्रकार हृद्धौतिं त्रिविधां कुर्याद्दण्डवमनवाससा ।। 36 ।। भावार्थ :- हृदय धौति को तीन प्रकार से किया जाता है :- 1. दण्ड ( दण्डधौति ), 2. वमन ( वमन धौति ), 3. वास ( वस्त्र धौति ) । दण्ड धौति विधि रम्भादण्डं हरिद्दन्डं वेत्रदण्डं तथैव च । हृन्मध्ये …
जिह्वामूल धौति लाभ अथात: सम्प्रवक्ष्यामि जिह्वाशोधनकारणम् । जरामरणरोगादीन् नाशयेद्दीर्घलम्बिका ।। 29 ।। भावार्थ :- इसके बाद मैं जिह्वा ( जीभ ) को लम्बी करने वाली, बुढ़ापा, मृत्यु, सभी रोगों को नष्ट करने वाली व जिह्वा को शुद्ध करने वाले कारण अर्थात् विधि का वर्णन करूँगा । विशेष :- इस श्लोक में …
प्रक्षालन विधि नाभिमग्ने जले स्थित्वा नाडीशक्तिं विसर्जयेत् । कराभ्यां क्षा लयेन्नाडीं यावन्मलविसर्जनम् ।। 23 ।। भावार्थ :- नाभि तक के गहरे पानी में उत्कटासन में बैठकर अपनी शक्तिनाड़ी ( मलद्वार ) को बाहर की ओर निकालकर दोनों हाथों से उसको अच्छी तरह से तब तक साफ करना चाहिए जब तक कि उसके अन्दर …
वह्निसार / अग्निसार धौति विधि नाभिग्रन्थिं मेरुपृष्ठे शतवारञ्च कारयेत् । अग्निसार इयं धौतिर्योगिनां योगसिद्धिदा ।। 19 ।। भावार्थ :- वह्निसार अपनी नाभि ( पेट के बीच में स्थित खड्डानुमा स्थान ) को मेरुदण्ड ( कमर ) के साथ सौ बार लगाने ( पेट को सौ बार आगे- पीछे करना ) को अग्निसार ( …
षट्कर्म वर्णन धौतिर्वस्तिस्तथा नेतिर्लौलिकी त्राटकं तथा । कपालभातिश्चैतानि षट्कर्माणि समाचरेत् ।। 12 ।। भावार्थ :- योग साधक को धौति, बस्ति, नेति, लौलिकी ( नौलि ), त्राटक व कपालभाति नामक इन छ: प्रकार की शुद्धि क्रियाओं का अभ्यास करना चाहिए । विशेष:- महर्षि घेरण्ड ने षट्कर्मों को योग के पहले अंग के रूप …
