दूसरा अध्याय ( सांख्ययोग ) गीता के दूसरे अध्याय से श्रीकृष्ण अर्जुन के विषाद का उपचार करना आरम्भ करते हैं । श्रीकृष्ण द्वारा गीता का ज्ञान इसी अध्याय से शुरू होता है । इसमें श्रीकृष्ण सांख्य योग के आधार पर अर्जुन को युद्ध की अनिवार्यता के लिए अनेक तर्क देते हैं । ज्ञान की दृष्टि

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Geeta Introduction – 2

गीता के अठारह अध्यायों का संक्षिप्त परिचय गीता का पूरा ज्ञान इसके अठारह अध्यायों में विभक्त है । अलग- अलग अध्याय में अलग- अलग प्रकार के योग की चर्चा की गई है । एक बार हम इसके सभी अध्यायों का नाम जान लेते हैं । उसके बाद प्रत्येक अध्याय के प्रमुख विषयों का संक्षिप्त वर्णन

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Geeta Introduction – 1

श्रीमद्भगवद्गीता परिचय   श्रीमद्भगवद्गीता भारत ही नहीं अपितु पूरे विश्व में सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला आध्यात्मिक ग्रन्थ है । विश्व की लगभग सभी भाषाओं में इसका अनुवाद हो चुका है । गीता में ज्ञानयोग, भक्तियोग, कर्मयोग व राजयोग के अतिरिक्त समत्वं योग, सन्यास योग, सांख्य योग, श्रद्धात्रय योग व मोक्ष का अद्भुत संगम है

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Geeta Introduction – श्रीमद्भगवद्गीता परिचय

तत्त्वं लयामृतं गोप्यं शिवोक्तं विविधानि च । तेषां संक्षेपमादाय कथितं मुक्तिलक्षणम् ।। 22 ।।   भावार्थ :-  इस समाधि रूपी गुप्त अमृत तत्त्व जिसकी विधि स्वयं भगवान शिव के द्वारा बताई गई है । मैंने उस समाधि के सभी लक्षणों को संक्षिप्त रूप में बता दिया है ।     इति ते कथितश्चण्ड! समाधिर्दुर्लभ: पर:

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Gheranda Samhita Ch. 7 [22-23]

आत्मा घटस्थचैतन्यमद्वैतं शाश्वतं परम् । घटादिभिन्नतो ज्ञात्वा वीतरागं विवासनम् ।। 20 ।।   भावार्थ :-  इस शरीर में स्थित आत्मा ( चैतन्य ) ही परम शाश्वत अर्थात् सत्य और अद्वैत ( एक ही भाव से युक्त ) है । इसे ( आत्मा को ) शरीर से अलग जानने से ही साधक राग व वासना से

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Gheranda Samhita Ch. 7 [20-21]