पुनर्जन्म अथवा बन्धन का काल – कृष्ण पक्ष   धूमो रात्रिस्तथा कृष्ण षण्मासा दक्षिणायनम्‌ । तत्र चान्द्रमसं ज्योतिर्योगी प्राप्य निवर्तते ।। 25 ।।     व्याख्या :-  धुआँ, रात्रि ( अँधेरा ), कृष्ण पक्ष और दक्षिणायन के छः महीनों के समय मरने वाले योगी चन्द्रमा के प्रकाश को प्राप्त करके अर्थात् अपने शुभ कर्मों के

Read More
Bhagwad Geeta Ch. 8 [25]

शुक्ल कृष्णे गती ह्येते जगतः शाश्वते मते । एकया यात्यनावृत्ति मन्ययावर्तते पुनः ।। 26 ।।     व्याख्या :-   मृत्यु के बाद परलोक जाने हेतु शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष को नित्य व स्थायी मार्ग माना गया है । इनमें से एक मार्ग ( शुक्ल पक्ष ) में गया हुआ योगी अर्थात् शुक्ल पक्ष में

Read More
Bhagwad Geeta Ch. 8 [26-28]