अहिंसासत्यास्तेयब्रह्मचर्यापरिग्रहा यमा: ।। 30 ।। शब्दार्थ :- अहिंसा ( किसी भी प्राणी को पीड़ा न पहुँचाना ) सत्य ( जो जैसा हो उसे वैसा ही कहना ) अस्तेय ( चोरी न करना ) ब्रह्मचर्य ( मोक्षकारक ग्रन्थों का अध्ययन व गुप्तेन्द्रियों का संयम ) अपरिग्रह ( अनावश्यक पदार्थों का संग्रह न करना ) …
यमनियमासनप्राणायामप्रत्याहारधारणाध्यानसमाधयोऽष्टावङ्गानि ।। 29 ।। शब्दार्थ :- यम ( अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य अपरिग्रह ) नियम ( शौच, सन्तोष, तप, स्वाध्याय, ईश्वर प्रणिधान ) आसन ( शरीर की स्थिर व सुखपूर्ण अवस्था ) प्राणायाम ( श्वास व प्रश्वास की गति पर नियंत्रण ) प्रत्याहार ( इन्द्रियों पर नियंत्रण ) धारणा ( चित्त की स्थिरता ) …
योगाङ्गानुष्ठानादशुद्धिक्षये ज्ञान दीप्तिराविवेकख्याते: ।। 28 ।। शब्दार्थ :- योगाङ्ग: ( योग के अंगों का ) अनुष्ठानात् ( पालन करने से ) अशुद्धि ( अशुद्धि अर्थात गन्दगी का ) क्षये, ( नाश होने से ) ज्ञानदीप्ति: ( ज्ञान के प्रकाश का उदय ) आविवेकख्याते: ( विवेकज्ञान की प्राप्ति तक होता है । ) सूत्रार्थ …
तस्य सप्तधा प्रान्तभूमि: प्रज्ञा ।। 27 ।। शब्दार्थ :- तस्य, ( उसकी ) सप्तधा ( सात प्रकार की ) प्रान्तभूमि: ( अन्तिम अवस्था वाली ) प्रज्ञा ( बुद्धि होती है । ) सूत्रार्थ :- उस विवेकख्याति को प्राप्त योगी की सात प्रकार की सबसे उत्कृष्ट अर्थात ऊँची बुद्धि होती है । व्याख्या …
विवेकख्यातिरविप्लवा हनोपाय: ।। 26 ।। शब्दार्थ :- अविप्लवा ( दोष रहित और निश्चित ) विवेकख्याति ( प्रकृत्ति व पुरुष के भेद का ज्ञान या विवेक ज्ञान की अवस्था ) हनोपाय: ( दुःख निवृति या मोक्ष का उपाय है । ) सूत्रार्थ :- प्रकृत्ति व पुरूष के भेद का निश्चित व दोष रहित ज्ञान …
