तासामनादित्वं चाशिषो नित्यत्वात् ।। 10 ।।   शब्दार्थ :- आशिष: ( जीवित रहने की इच्छा का ) नित्यत्वात् ( सदा बने रहने से ) तासाम् ( उन सभी संस्कारों अथवा वासनाओं का ) अनादित्वं ( प्रवाह आदि काल से ) च ( ही है )     सूत्रार्थ :- जीवन को जीने की लालसा या

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Yoga Sutra 4 – 10

जातिदेशकालव्यवहितानामप्यानन्तर्यं स्मृतिसंस्कारयोरेकरूपत्वात् ।। 9 ।।   शब्दार्थ :- जाति ( विशेष समूह ) देश ( स्थान ) काल ( समय के ) व्यहितानाम् ( व्यवधान या अन्तर होने पर ) अपि ( भी ) स्मृति ( याददाश्त और ) संस्कारयो: ( कर्म संस्कारों के ) एकरूपत्वात् ( एक समान या एक ही विषय होने से

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Yoga Sutra 4 – 9

ततस्तद्विपाकानुगुणानामेवाभिव्यक्तिर्वासनानाम् ।। 8 ।।   शब्दार्थ :- तत: ( उन अर्थात अन्य तीन प्रकार के कार्यों से ) तद् ( उन ) विपाक ( कर्मों के फल ) अनुगुणानाम् ( भोगों के अनुसार ) एव ( ही ) वासनानाम् ( वासनाएँ अर्थात संस्कार ) अभिव्यक्ति: ( प्रकट अथवा उत्पन्न होती हैं )     सूत्रार्थ

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Yoga Sutra 4 – 8

कर्माशुक्लाकृष्णं योगिनस्त्रिविधमितरेषाम् ।। 7 ।।   शब्दार्थ :- योगिन: ( योगी के ) कर्म ( कार्य ) अशुक्ल ( पुण्य से रहित व ) अकृष्णम् ( पाप से रहित होते हैं ) इतरेषाम् ( अन्यों अर्थात दूसरों के ) त्रिविधम् ( तीन प्रकार के होते हैं )     सूत्रार्थ :- योगी व्यक्तियों के कर्म

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Yoga Sutra 4 – 7

तत्र ध्यानजमनाशयम् ।। 6 ।।   शब्दार्थ :- तत्र ( उनमें से अर्थात पूर्व में वर्णित चित्तों में ) ध्यानजम् ( ध्यान से जनित अर्थात उत्पन्न चित्त ) अनाशयम् ( आश्रय से रहित अर्थात कर्म संस्कार से रहित होता है )   सूत्रार्थ :- पहले के सूत्रों में कहे गए चित्तों में से ध्यान से

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Yoga Sutra 4 – 6