मोक्ष प्राप्ति मामुपेत्य पुनर्जन्म दुःखालयमशाश्वतम् । नाप्नुवन्ति महात्मानः संसिद्धिं परमां गताः ।। 15 ।। व्याख्या :- इस प्रकार परम सिद्धि की प्राप्ति करने वाले महात्मा मुझे प्राप्त करके, दुःखों के घर व अक्षणभंगुर अर्थात् ( जिसका अन्त निश्चित है ) ऐसे पुनर्जन्म से सदा के लिए मुक्त होकर, परमगति ( मोक्ष ) …
यदक्षरं वेदविदो वदन्ति विशन्ति यद्यतयो वीतरागाः । यदिच्छन्तो ब्रह्मचर्यं चरन्ति तत्ते पदं संग्रहेण प्रवक्ष्ये ।। 11 ।। व्याख्या :- वेद को जानने वाले विद्वान जिसे अक्षर अर्थात् अविनाशी कहते हैं, जिनके राग व द्वेष नामक क्लेश समाप्त हो गए हैं, ऐसे सन्यासी ही जिसे प्राप्त करते हैं और साधक लोग जिसको प्राप्त करने …
तस्मात्सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युद्ध च । मय्यर्पितमनोबुद्धिर्मामेवैष्यस्यसंशयम् ।। 7 ।। व्याख्या :- इसलिए हे अर्जुन ! तुम सभी कालों में सदा मेरा ही स्मरण करते हुए युद्ध करो । इस प्रकार तुम अपने मन व बुद्धि को मुझमें अर्पित करके निश्चित रूप से मुझे ही प्राप्त करोगे, इसमें किसी प्रकार का कोई सन्देह …
विशेष :- आठवें अध्याय का आरम्भ अर्जुन के इन सात प्रश्नों से होता है, जिनका उपदेश पिछले ( 7 वें ) अध्याय में श्रीकृष्ण द्वारा किया गया था । इनका उत्तर देते हुए श्रीकृष्ण अगले श्लोकों में कहते हैं – श्रीभगवानुवाच अर्जुन के प्रश्नों के उत्तर अक्षरं ब्रह्म परमं स्वभावोऽध्यात्ममुच्यते । भूतभावोद्भवकरो विसर्गः …
आठवां अध्याय ( अक्षर ब्रह्म योग ) अक्षरब्रह्म योग नामक आठवें अध्याय में कुल अठाइस ( 28 ) श्लोकों का वर्णन किया गया है । इस अध्याय की शुरुवात में ही अर्जुन श्रीकृष्ण से निम्न सात प्रश्न पूछता है – ब्रह्म क्या है ? अध्यात्म क्या है ? कर्म क्या है ? अधिभूत क्या …
