तज्ज: संस्कारोंऽन्यसंस्कारप्रतिबन्धी ।। 50 ।।   शब्दार्थ :- तज्ज, ( उससे उत्पन्न होने वाला ) संस्कार:, ( विचार ) अन्य, ( दूसरे ) संस्कारो, ( विचारों को ) प्रतिबन्धी, ( रोकने वाला होता है । )   सूत्रार्थ :- उस ऋतम्भरा प्रज्ञा से उत्पन्न होने वाला संस्कार या विचार अन्य सभी दूसरे व्युत्थान अर्थात परेशान

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Yoga Sutra – 50

तस्यापि निरोधे सर्वनिरोधान्निर्बीज: समाधिः ।। 51 ।।   शब्दार्थ :- तस्य, ( उसके ) अपि, ( भी ) निरोधे, ( रुकने से ) सर्व, ( सभी ) निरोधात्, ( चित्त वृत्तियों का भी निरोध हो जाने से अर्थात सभी चित्त वृत्तियों के रुक जाने से ) निर्बीज:, ( निर्बीज ) समाधि:, ( समाधि होती है

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Yoga Sutra – 51