अश्वनी मुद्रा विधि व फल वर्णन आकुञ्चयेद् गुदाद्वारं प्रकाशयेत् पुनः पुनः । सा भवेदश्विनी मुद्रा शक्तिप्रबोधकारिणी ।। 82 ।। अश्वनी परमा मुद्रा गुह्यरोगविनाशिनी । बलपुष्टिकरी चैव अकालमरणं हरेत् ।। 83 ।। भावार्थ :- गुदाद्वार अथवा गुदा को बार- बार सिकोड़ना ( अन्दर खींचना ) व फैलाना ( बाहर की ओर धकेलना ) अश्वनी …
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