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Shrimad Bhagwad Geeta

Shrimad Bhagwad Geeta Ch. 10 [24-27]

अध्याय 10: विभूतियोग

मूल श्लोक · 10.24

पुरोधसां च मुख्यं मां विद्धि पार्थ बृहस्पतिम्‌ । सेनानीनामहं स्कन्दः सरसामस्मि सागरः ।। 24 ।।

व्याख्या

हे पार्थ ! पुरोहितों में मुझे मुख्य पुरोहित बृहस्पति जानो, सेनापतियों अथवा सेनानायकों में मैं कार्तिकेय हूँ और जलाशयों में मैं समुद्र हूँ ।

मूल श्लोक · 10.25

महर्षीणां भृगुरहं गिरामस्म्येकमक्षरम्‌ । यज्ञानां जपयज्ञोऽस्मि स्थावराणां हिमालयः ।। 25 ।।

व्याख्या

महर्षियों में मैं भृगु हूँ, शब्दों में मैं ओंकार हूँ, सभी यज्ञों में मैं जपयज्ञ हूँ और स्थिर रहने वालों में मैं हिमालय पर्वत हूँ ।

मूल श्लोक · 10.26

अश्वत्थः सर्ववृक्षाणां देवर्षीणां च नारदः । गन्धर्वाणां चित्ररथः सिद्धानां कपिलो मुनिः ।। 26 ।।

व्याख्या

सभी वृक्षों में मैं पीपल हूँ और देवर्षियों में मैं नारद हूँ । गन्धर्वों में मैं चित्ररथ हूँ तथा सभी सिद्धों में मैं कपिल मुनि हूँ ।

मूल श्लोक · 10.27

उच्चैःश्रवसमश्वानां विद्धि माममृतोद्धवम्‌ । एरावतं गजेन्द्राणां नराणां च नराधिपम्‌ ।। 27 ।।

व्याख्या

अश्वों अथवा घोड़ों में मुझे उच्चै:श्रवा नामक अश्व समझो, हाथियों में ऐरावत और मनुष्यों में मुझे राजा समझो ।

विशेष

घोड़ों में उच्चै:श्रवा सबसे उच्च श्रेणी का घोड़ा होता है, इसी प्रकार ऐरावत को सबसे श्रेष्ठ हाथी व आदमियों में सबसे श्रेष्ठ राजा माना जाता है ।